Varavara Rao : Official Blog

" I am a drop of water seeking liberty in the liberty of sea… "

छह दि‍संबर एक तलाश : वरवर राव

Posted on | January 8, 2011 | No Comments

- आर. शांता सुंदरी

न्‍यायधीश शर्मा जी मोहि‍त हो गए
उन टूटे-फूटे खंडहरों के वि‍ध्‍वंस में
सनातन की गंध महसूस हुई शायद
लेकि‍न
देर से बड़ी ख्‍वाहि‍शों के बाद जन्‍में उस बच्‍चे को
हद से ज्‍यादा लाड-प्‍यार दि‍या था शायद
कि‍ वह लाडला सयाना हुआ ही नहीं
वोट डालने की उम्र से पहले ही
चाव से मुनि‍यों के बुलाने पर चला गया जंगल
स्‍त्री समझकर भी हि‍चकि‍चाया नहीं मारने को
धनुष तोड़ने से लेकर बाण चलाने तक
न जाने कैसी-कैसी वि‍शि‍ष्‍ट वि‍द्याएं सीख ली उसने
दुश्‍मनों को ही नहीं
माता-पि‍ता को भी दु:ख देकर मारने वाला
संदेह को ही प्‍यार का प्रमाण मानकर
जीवन-साथी को जंगल के हवाले कर देने वाला
दंडकारण्‍य में और श्रीलंका में
उस जमाने में भी
आपरेशन ग्रीनहंट और आइपीकेएफ
चलानेवाला आदर्श नरेश
देश को खडाऊं का पालन और दासता प्रदान करनेवाला
पि‍रामि‍ड या फासि‍ल की तरह
दर्शन या प्रदर्शन के लि‍ए ही तो
नमन कि‍या जा सकता है
या उपेक्षा की जा सकती है
जाषुवा* ने कहा था—
सांपों को दूध पि‍लाकार
पत्‍थर के देवता को नैवेद्य समर्पित करनेवाले देश में
सांपों के दांत नि‍कल आते
देवताओं के हाथों के हथि‍यार जिंदा हो जाते
और
बाबरी, गुजरात, कन्‍दमाल
मृत्‍यु-क्षेत्र बनते जाते
स्‍वार्थ का वि‍कृत तीसरा पैर उग आया
ओर धरती के लि‍ए
महाबलि‍ को वि‍स्‍थापि‍त करनेवाले वामन को
’सेज’ जन्‍मभूमि‍ के वासि‍यों के लि‍ए
हल चलाने वालों को
अपनी जमीन से बेदखल करने वाले वामन के वारि‍सों को छोड़
हमारी पुण्‍यभूमि‍ में
क्‍या बुद्ध की तरह कोई सयाना ईश्‍वर
पैदा नहीं होगा?

  • क्रांतिकारी कवि वरावर राव की यह कविता तेलुगु दैनिक आम्ध्राज्योती में 6 दिसम्बर को प्रकाशित हुई थी। इसका हिंदी अनुवाद आर. शांता सुंदरी ने कि‍या है-
  • * जाषुवा तेलुगु के बहुत बड़े कवि थे। लगभग सौ साल पहले ही उन्होंने दलितों के समर्थन में और उनके प्रति भेदभाव रखने के खिलाफ कविताएँ लिखीं। लेखन काल(1915-1965)। मानवतावादी कवि के रूप में प्रसिद्ध हुए।
  • Read the same in Telugu : డిసెంబర్ 6 దేవులాట

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